कहानी: अभ्यास की शक्ति
एक बार की बात है, एक गाँव में एक तीरंदाज रहता था, जो तीर चलाने में बहुत ही निपुण था। वह विभिन्न गाँवों में जाकर अपना तीरंदाजी का प्रदर्शन करता और जहाँ भी जाता, लोग उसे देखकर बहुत प्रभावित होते थे। जब भी वह तीर चलाता, निशाने पर सटीक तीर लगता और लोग ताली बजाकर उसकी प्रशंसा करते।
एक दिन, जब वह तीर चलाकर अपना प्रदर्शन कर रहा था, तो हमेशा की तरह, उसने निशाना साधा और तीर बिल्कुल सही निशाने पर जाकर लगा। लोग तालियाँ बजाने लगे, लेकिन तभी भीड़ में से किसी ने पीछे से कहा, "यह तो सिर्फ अभ्यास का कमाल है।" तीरंदाज को यह सुनकर थोड़ा बुरा लगा। उसने सोचा, "मैं इतना कुशल तीरंदाज हूँ, और यह व्यक्ति मेरे हुनर को अभ्यास मात्र बता रहा है। यह तो मेरे भीतर की विशेषता है, जो हर किसी के पास नहीं होती।"
फिर तीरंदाज ने दोबारा तीर चलाया, और निशाना फिर से बिल्कुल सही लगा। लोग तालियाँ बजाने लगे, लेकिन फिर से वही आवाज आई, "यह तो सिर्फ अभ्यास का मामला है।" यह सुनकर तीरंदाज को और गुस्सा आया। उसने अपना प्रदर्शन समाप्त किया और उस व्यक्ति को खोजने निकला, जो बार-बार यह कह रहा था। जब वह उस व्यक्ति के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि वह व्यक्ति एक बड़े मटके से एक छोटी बोतल में बिना एक बूंद भी गिराए तेल डाल रहा था। तीरंदाज यह देखकर हैरान रह गया।
उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम तीरंदाजी में निपुण हो क्योंकि तुमने उसका अभ्यास किया है। इसी प्रकार, मैं इस मटके से बोतल में बिना गिराए तेल डाल सकता हूँ क्योंकि मैं इसका अभ्यास करता हूँ। जिस चीज़ का हम अभ्यास करते हैं, हम उसी में कुशल हो जाते हैं।"
तीरंदाज ने यह सुनकर समझ लिया कि अभ्यास ही किसी भी काम में कुशलता लाता है, चाहे वह तीर चलाना हो या तेल डालना।
शिक्षा: हम जिस भी काम का नियमित अभ्यास करते हैं, उसी में निपुणता प्राप्त करते हैं।

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